Translate this web page in your own language
Showing posts with label CRS. Show all posts
Showing posts with label CRS. Show all posts
Thursday, April 7, 2011
Wednesday, November 4, 2009
वरयाम सिंह सर...
रुसी काव्य का हिन्दी अनुवाद और वरयाम सिंह दोनों एक दुसरे के पर्याय बन चुके हैं।
आप जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में रुसी साहित्य के प्रोफेसर हैं।
Monday, July 20, 2009
कल..
Friday, March 20, 2009
सब बहुत याद आएंगे....
जेएनयू में अपने सेन्टर के सेकंड इयर के बच्चों के साथ आज मेरी आखिरी क्लास थी। किसी भी चीज़ के छूटने का दुःख तो होताही है सो इसका भी है। पर यह अच्छा है की दुःख कैसा भी हो स्थायी नही होता। सोचता हूँ दुःख अगर स्थायी होने लगे तो जीनामुश्किल हो जाए लोगों का। चाहें जैसा भी हो समय के साथ वह भी पीछे छूट ही जाता है। आगे जो बढ़ना है...सो चलो आगे बढ़तेहैं। आगे यही बिताये पल जब याद आएंगे तो सुख देंगे। कम से कम इस बात का तो फर्स्ट हैण्ड तज़रबा हम सब को है।
Subscribe to:
Posts (Atom)
